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#961 [Permalink] Posted on 27th February 2021 07:09
abuzayd2k wrote:
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For me too it clarified a few things.

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#962 [Permalink] Posted on 27th February 2021 07:28
Zia Imtiaz's Wonderful Post on Facebook


Google Translation of Original Hindi Post

In a video on YouTube and a post written on Facebook, I saw the same claim that earlier in the Islamic world there were many scientists, chemists, physicians and mathematicians, but the eleventh-century Sufi saint Imam Ghazali (Reh) with the numbers The play was claimed to be un-Islamic, after which the Muslim society completely turned to science and modern teachings and this community went on the decline, ...... responsible for the current "collapse" of the Muslim community. , How much truth is there in this thing that justifies Muslims?
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...... According to the claim, after Imam Ghazali, there should not be a scientist in the Islamic world and Mathematicians should not have been at all, but when we get information about this, we find that after the eleventh century Math. And the claim of turning the Muslim community away from science is completely wrong, see that there have been notable mathematicians and scientists in the Muslim community till the seventeenth century (Wikipedia link removed)
.
.... It is true that Imam Ghazali had expressed his interest in Math, the inclination towards Philosophy and the effect of Philosophy against the oppressed of Muslims .... But that was not a fatwa. , Rather he had a view, and because his view was not based on any statement of the Qur'an and the Hadith, no Muslim was obliged to follow that thought, and in practice the same is seen that Imam Ghazali's After all, there have been big names Mathematicians in the Muslim world, Chemistry, Aviation, Aptometry and in many areas Muslim Scientists have made great announcements.
.... Rather the truth is that from history till today it has never happened that the Muslim community has completely turned away from education and science, even today there is no shortage of talented Muslim scientists in the world .... Yes It is a matter of course that the Muslim community in our country itself seems to be largely away from modern education, but the reason is not the religious thinking of the Muslims, but their weak economic condition !!
.
.... when such things arise in which the religious plight of the Muslims themselves is held responsible for the current plight of the Muslims, ... but whenever we go to investigate these claims, the truth can come out of something else. Comes ..
..... From the experiences so far, I have understood that the reason for the end of the Islamic Golden Age is not within the Muslim community, but the reason that the Golden Age was damaged was external, and it was the Muslim Sultanates For centuries, the crusaders, against the brutal system of Imperialism in the world, have always faced the invasions of Muslims, you may be aware that the infamous Mongol Genghis Khan as the world's most ruthless murderer in the 13th century in the world. He had killed and killed about four crore people, he committed so many murders that he did not give up the existence of life in millions of cities, settlements and villages of his time and where the first cities and settlements were there, the forests grew, Genghis Khan The Muslim empire spread across Europe and Asia was almost destroyed, it used to shed rivers of innocent civilian blood in the country where it went, it is clear how many talented Muslims were also killed without any reason at such a time. And no wonder that those massacres caused Muslims The world has been deprived of many possible discoveries by scientists !!
Well, even in the current era, people of Muslim community are making significant contribution in different fields including education, arts, sports and science ... and these Sha Allah, they will continue to contribute in the future .... because the origins of Islam There is no reason that prevents Muslims from science and discoveries, but in the Qur'an, the number of verses in which the subtle inspection of nature is feasted is many times more than all those verses which offer Namaz, Rosa, Haj Etc. are related to orders.



Original Post

यूट्यूब पर आई एक वीडियो और फेसबुक पर लिखी गई एक पोस्ट में मैंने एक ही दावे को देखा कि पहले इस्लामी दुनिया में बहुत वैज्ञानिक, रसायनशास्त्री, चिकित्सक और गणितज्ञ हुआ करते थे लेकिन ग्यारहवीं शताब्दी हुए सूफ़ी सन्त इमाम ग़ज़ाली (रह०) ने नम्बरों के साथ खेलने को गैर इस्लामी होने का फ़तवा दे दिया जिसके बाद मुस्लिम समाज ने पूरी तरह से विज्ञान और आधुनिक शिक्षाओं से मुंह मोड़ लिया और ये समुदाय पतन की ओर बढ़ता चला गया, ...... मुस्लिम समुदाय के मौजूदा "पतन" का जिम्मेदार, खुद मुस्लिमों को ठहराने वाली इस बात में कितनी सच्चाई है ??
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...... दावे के मुताबिक इमाम ग़ज़ाली के बाद इस्लामी दुनिया में वैज्ञानिक नही होने चाहिये थे और मैथेमेटिशियन तो हरगिज़ ही नही होने चाहिये थे, पर जब हम इस बारे में जानकारी हासिल करते हैं तो पाते हैं कि ग्यारहवीं शताब्दी के बाद मैथ और साइंस से मुस्लिम समुदाय के मुंह मोड़ लेने का दावा एकदम गलत है, देखिये सत्रहवीं शताब्दी तक मुस्लिम समुदाय में उल्लेखनीय गणितज्ञ और वैज्ञानिक हुए हैं (Wikipedia link removed).
.... ये बात सही है कि इमाम ग़ज़ाली ने मैथ में दिलचस्पी लेने से फिलॉसफी की तरफ़ झुकाव होने और फिलॉसफी के असर में आकर मुसलमानों के दीन के ख़िलाफ़ हो जाने का ख्याल ज़ाहिर किया था.... लेकिन वो कोई फ़तवा नही था, बल्कि उनका एक ख्याल था, और क्योंकि उनका ख़्याल क़ुरआन और हदीस के किसी वक्तव्य पर आधारित नहीं था, सो उस ख्याल का पालन करने की किसी भी मुस्लिम को बाध्यता नही थी, और व्यवहार में भी यही देखने में आता है कि इमाम ग़ज़ाली के बाद भी मुस्लिम दुनिया में बड़े नामवर मैथेमैटिशयन भी होते रहे, कैमिस्ट्री, एविएशन, एप्टोमेट्री और कई क्षेत्रों में मुस्लिम साइंटिस्ट्स ने बड़ी बड़ी इजादें की हैं
.... बल्कि सच ये है कि इतिहास से लेकर आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ कि मुस्लिम समुदाय ने पूरी तरह शिक्षा और विज्ञान से मुंह मोड़ लिया हो, आज भी विश्व में प्रतिभावान मुस्लिम वैज्ञानिकों की कोई कमी नहीं है.... हाँ ये बात जरूर है कि खुद हमारे देश में मुस्लिम समुदाय काफी हद तक आधुनकि शिक्षा से दूर नज़र आता है, पर इसका कारण मुस्लिमों की धार्मिक सोच नही, बल्कि उनकी कमज़ोर आर्थिक स्थिति है !!
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.... ऐसी बातें जब तब उठा करती हैं जिनमें मुस्लिमों की मौजूदा बदहाली का ज़िम्मेदार खुद मुस्लिमों की धार्मिक सोच को ठहराया जाता रहता है, ... पर जब भी हम इन दावों की पड़ताल करने चलते हैं तो सच कुछ और ही निकल कर आता है..
..... अब तक के अनुभवों से मुझे यही समझ में आया है कि इस्लामिक गोल्डन एज के खत्म होने का कारण मुस्लिम समुदाय के अंदर नही है, बल्कि इस गोल्डन एज को नुक्सान पहुँचाने वाला कारण बाहरी था, और वो था मुस्लिम सल्तनतों के ख़िलाफ़ सदियों तक चलने वाले क्रूसेडर्स, दुनिया में इम्पीयरलिज़्म की क्रूर व्यवस्था के कारण भी मुस्लिमों को हमेशा आक्रमणों का सामना करते रहना पड़ा, आप जानते ही होंगे कि 13वीं शताब्दी में विश्व के सबसे क्रूर हत्यारे के रूप में कुख्यात मंगोल चंगेज़ खान ने दुनिया में भयंकर मारकाट मचा दी थी और करीब चार करोड़ लोगों की हत्या करवा दी, उसने इतनी हत्याएं करवाईं कि अपने समय के लाखों शहरों, बस्तियों और गावों में जीवन का अस्तित्व तक नहीं छोड़ा और जहां पहले शहर और बस्तियां थीं वहां जंगल उग गए, चंगेज़ खान ने यूरोप और एशिया में फैले मुस्लिम साम्राज्य को लगभग खत्म ही कर डाला था, वो जिस देश में जाता वहां अकारण ही निर्दोष नागरिकों के खून की नदियां भी बहा दिया करता था, स्पष्ट है कि ऐसे समय में कितने ही प्रतिभावान मुस्लिमों की भी अकारण हत्याएं कर डाली गईं और कोई आश्चर्य नहीं कि उन नरसंहारों के कारण मुस्लिम वैज्ञानिकों की कई सम्भावित खोजों से दुनिया वंचित रह गई हो !!
ख़ैर, मौजूदा दौर में भी मुस्लिम समुदाय के लोग शिक्षा, कला, खेल और विज्ञान समेत अलग अलग क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, ...और इन शा अल्लाह, आगे भी ये योगदान देते रहेंगे.... क्योंकि इस्लाम के मूल में ऐसा कोई भी कारण नही है जो मुस्लिमों को विज्ञान और खोजों से रोकता हो, बल्कि क़ुरआन में तो उन आयतों की संख्या जिनमें प्रकृति के सूक्ष्म निरीक्षण की दावत दी गई है, उन सब आयतों से कई गुना अधिक है जो नमाज, रोज़ा, हज आदि आदेशों से संबंधित हैं।
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