Forum Menu - Click/Swipe to open
 
Top Members

On Kashmir

Jump to page:

You have contributed 0.0% of this topic

Thread Tools
Appreciate
Topic Appreciation
abu mohammed, Jinn, bint e aisha, sipraomer, abuzayd2k
Rank Image
Muadh_Khan's avatar
Offline
UK
11,516
Brother
10,060
Muadh_Khan's avatar
#361 [Permalink] Posted on 4th May 2020 16:57
04MAR2020: Colonel Ashutosh Sharma Killed

Military activity occurred in a house in Kashmir. Indian Army pounded it with every piece of artillery available for over two hours, confident that "militants" have been neutralised they sent in a team to recover bodies and lost Radio contact.

Eventually Commanding Officer (who was dumb enough to go inside) was also killed.

A colonel doesn't lead a CI op but that's a different story.

economictimes.indiatimes.com/news/defence/martyred-in-han...

CNN-IBN reported it THEN denied it. All of India denied it and called for CNN-IBN to be banned or charged with sedition, until it could not be denied.

This isn't the story.

The Story is when Indian Army lost contact with their commanding officer, desperate to make contact they (having no choice) rang his (personal mobile number), someone picked it up and said "As-salāmu ʿalaykum" :lol :P

Reported by IB Times (India) and now denied.
report post quote code quick quote reply
back to top
Rank Image
Maripat's avatar
Offline
Gham-o-Huzn
2,617
Brother
3,198
Maripat's avatar
#362 [Permalink] Posted on 6th May 2020 10:01
नब्बे के दशक में कश्मीरी पंडितों का पलायन : कुछ तथ्य

Written by अशोक कुमार पाण्डेय | Published on: July 5, 2017

1. 1990 के दशक में कश्मीर घाटी में आतंकवाद के चरम के समय बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों ने घाटी से पलायन किया. पहला तथ्य संख्या को लेकर. कश्मीरी पंडित समूह और कुछ हिन्दू दक्षिणपंथी यह संख्या चार लाख से सात लाख थी. लेकिन यह संख्या वास्तविक संख्या से बहुत अधिक है. असल में कश्मीरी पंडितों की आख़िरी गिनती 1941 में हुई थी और उसी से 1990 का अनुमान लगाया जाता है. इसमें 1990 से पहले रोज़गार तथा अन्य कारणों से कश्मीर छोड़कर चले गए कश्मीरी पंडितों की संख्या घटाई नहीं जाती. अहमदाबाद में बसे कश्मीरी पंडित पी एल डी परिमू ने अपनी किताब “कश्मीर एंड शेर-ए-कश्मीर : अ रिवोल्यूशन डीरेल्ड” में 1947-50 के बीच कश्मीर छोड़ कर गए पंडितों की संख्या कुल पंडित आबादी का 20% बताया है.(पेज़-244) चित्रलेखा ज़ुत्शी ने अपनी किताब “लेंग्वेजेज़ ऑफ़ बिलॉन्गिंग : इस्लाम, रीजनल आइडेंटीटी, एंड मेकिंग ऑफ़ कश्मीर” में इस विस्थापन की वज़ह नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा लागू किये गए भूमि सुधार को बताया है (पेज़-318) जिसमें जम्मू और कश्मीर में ज़मीन का मालिकाना उन ग़रीब मुसलमानों, दलितों तथा अन्य खेतिहरों को दिया गया था जो वास्तविक खेती करते थे, इसी दौरान बड़ी संख्या में मुस्लिम और राजपूत ज़मींदार भी कश्मीर से बाहर चले गए थे. ज्ञातव्य है कि डोगरा शासन के दौरान डोगरा राजपूतों, कश्मीरी पंडितों और कुलीन मुसलमानों के छोटे से तबके ने कश्मीर की लगभग 90 फ़ीसद ज़मीनों पर कब्ज़ा कर लिया था. (विस्तार के लिए देखें “हिन्दू रूलर्स एंड मुस्लिम सब्जेक्ट्स”, मृदु राय) इसके बाद भी कश्मीरी पंडितों का नौकरियों आदि के लिए कश्मीर से विस्थापन जारी रहा (इसका एक उदाहरण अनुपम खेर हैं जिनके पिता 60 के दशक में नौकरी के सिलसिले में शिमला आ गए थे) सुमांत्रा बोस अपनी किताब “कश्मीर : रूट्स ऑफ़ कंफ्लिक्ट, पाथ टू पीस” में यह संख्या एक लाख बताई है,( पेज़ 120) राजनीति विज्ञानी अलेक्जेंडर इवांस विस्थापित पंडितों की संख्या डेढ़ लाख से एक लाख साठ हज़ार बताते हैं, पारिमू यह संख्या ढाई लाख बताते हैं. सी आई ए ने एक रिपोर्ट में यह संख्या तीन लाख बताई है. एक महत्त्वपूर्ण तथ्य की ओर अनंतनाग के तत्कालीन कमिश्नर आई ए एस अधिकारी वजाहत हबीबुल्लाह कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति के श्रीनगर से 7 अप्रैल, 2010 की प्रेस रिलीज़ के हवाले से बताते हैं कि लगभग 3000 कश्मीरी पंडित परिवार स्थितियों के सामान्य होने के बाद 1998 के आसपास कश्मीर से पलायित हुए थे. (देखें, पेज़ 79,माई कश्मीर : द डाइंग ऑफ़ द लाईट, वजाहत हबीबुल्ला). बता दूँ कि कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति इन भयानक स्थितियों के बाद भी कश्मीर से पलायित होने से इंकार करने वाले पंडितों का संगठन है. अब भी कोई साढ़े तीन हज़ार कश्मीरी पंडित घाटी में रहते हैं, बीस हज़ार से अधिक सिख भी हैं और नब्बे के दशक के बाद उन पर अत्याचार की कोई घटना नहीं हुई, हाँ हर आम कश्मीरी की तरह उनकी अपनी आर्थिक समस्याएं हैं.हाल में ही तीस्ता सीतलवाड़ ने उनकी मदद के लिए अपील जारी की थी. (indianculturalforum.in/2016/10/12/humanitarian-appeal-for...) साथ ही एक बड़ी समस्या लड़कों की शादी को लेकर है क्योंकि पलायन कर गए कश्मीरी पंडित अपनी बेटियों को कश्मीर नहीं भेजना चाहते.

गुजरात हो कि कश्मीर, भय से एक आदमी का भी अपनी ज़मीन छोड़ना भयानक है, लेकिन संख्या को बढ़ा कर बताना बताने वालों की मंशा तो साफ़ करता ही है.

2. उल्लिखित पुस्तक में ही परिमू ने बताया है कि उसी समय लगभग पचास हज़ार मुसलमानों ने घाटी छोड़ी. कश्मीरी पंडितों को तो कैम्पों में जगह मिली, सरकारी मदद और मुआवज़ा भी. लेकिन मुसलमानों को ऐसा कुछ नहीं मिला (देखें, वही) सीमा क़ाज़ी अपनी किताब “बिटवीन डेमोक्रेसी एंड नेशन” में ह्यूमन राईट वाच की एक रपट के हवाले से बताती हैं कि 1989 के बाद से पाकिस्तान में 38000 शरणार्थी कश्मीर से पहुँचे थे. केप्ले महमूद ने अपनी मुजफ्फराबाद यात्रा में पाया कि सैकड़ों मुसलमानों को मार कर झेलम में बहा दिया गया था. इन तथ्यों को साथ लेकर वह भी उस दौर में सेना और सुरक्षा बलों के अत्याचार से 48000 मुसलमानों के विस्थापन की बात कहती हैं. इन रिफ्यूजियों ने सुरक्षा बलों द्वारा, पिटाई, बलात्कार और लूट तक के आरोप लगाए हैं. अफ़सोस कि 1947 के जम्मू नरसंहार (विस्तार के लिए इंटरनेट पर वेद भसीन के उपलब्ध साक्षात्कार या फिर सईद नक़वी की किताब “बीइंग द अदर” के पेज़ 173-193) की तरह इस विस्थापन पर कोई बात नहीं होती.

3. 1989-90 के दौर में कश्मीरी पंडितों की हत्याओं के लेकर भी सरकारी आँकड़े सवा सौ और कश्मीरी पंडितों के दावे सवा छः सौ के बीच भी काफ़ी मतभेद हैं. लेकिन क्या उस दौर में मारे गए लोगों को सिर्फ़ धर्म के आधार पर देखा जाना उचित है.

परिमू के अनुसार हत्यारों का उद्देश्य था कश्मीर की अर्थव्यवस्था, न्याय व्यवस्था और प्रशासन को पंगु बना देने के साथ अपने हर वैचारिक विरोधी को मार देना था. इस दौर में मरने वालों में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता मोहम्मद युसुफ़ हलवाई, मीरवायज़ मौलवी फ़ारूक़, नब्बे वर्षीय पूर्व स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी मौलाना मौदूदी, गूजर समुदाय के सबसे प्रतिष्ठित नेता क़ाज़ी निसार अहमद, विधायक मीर मुस्तफ़ा,श्रीनगर दूरदर्शन के डायरेक्टर लासा कौल, एच एम टी के जनरल मैनेज़र एच एल खेरा, कश्मीर विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रोफ़ेसर मुशीर उल हक़ और उनके सचिव अब्दुल गनी, कश्मीर विधान सभा के सदस्य नाज़िर अहमद वानी शामिल थे (वही, पेज़ 240-41)ज़ाहिर है आतंकवादियों के शिकार सिर्फ़ कश्मीरी पंडित नहीं, मुस्लिम भी थे. हाँ, पंडितों के पास पलायित होने के लिए जगह थी, मुसलमानों के लिए वह भी नहीं. वे कश्मीर में ही रहे और आतंकवादियों तथा सुरक्षा बलों, दोनों के अत्याचारों के शिकार होते रहे.

जगमोहन के कश्मीर में शासन के समय वहाँ के लोगों के प्रति रवैये को जानने के लिए एक उदाहरण काफी होगा. 21 मई 1990 को जब मौलवी फ़ारूक़ की हत्या के बाद जब लोग सड़कों पर आ गए तो वह एक आतंकवादी संगठन के ख़िलाफ़ थे लेकिन जब उस जुलूस पर सेना ने गोलियाँ चलाईं और भारतीय प्रेस के अनुसार 47 (और बीबीसी के अनुसार 100 लोग) गोलीबारी में मारे गए तो यह गुस्सा भारत सरकार के ख़िलाफ़ हो गया. (देखें, कश्मीर : इंसरजेंसी एंड आफ़्टर, बलराज पुरी, पेज़-68) गौकादल में घटी यह घटना नब्बे के दशक में आतंकवाद के मूल में मानी जाती है. इन दो-तीन सालों में मारे गए कश्मीरी मुसलमानों की संख्या 50000 से एक लाख तक है. श्रीनगर सहित अनेक जगहों पर सामूहिक क़ब्रें मिली हैं. आज भी वहाँ हज़ारो माएं और व्याह्ताएं “आधी” हैं – उनके बेटों/पतियों के बारे में वे नहीं जानती कि वे ज़िंदा हैं भी या नहीं, बस वे लापता हैं. thewire.in/46426/the-plight-of-kashmirs-half-widows-and-w...आप तमाम तथ्यों के अलावा शहनाज़ बशीर का उपन्यास “द हाफ़ मदर” पढ़ सकते हैं. )

4. कश्मीर से पंडितों के पलायनों में जगमोहन की भूमिका को लेकर कई बातें होती हैं. पुरी के अनुसार जगमोहन को तब भाजपा और तत्कालीन गृह मंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद के कहने पर कश्मीर का गवर्नर बनाया गया था. उन्होंने फ़ारूक़ अब्दुल्ला की सरकार को बर्ख़ास्त कर सारे अधिकार अपने हाथ में ले लिए थे. अल जज़ीरा को दिए एक साक्षात्कार में मृदु राय ने इस संभावना से इंकार किया है कि योजनाबद्ध तरीक़े से इतनी बड़ी संख्या में पलायन संभव है. लेकिन वह कहती हैं कि जगमोहन ने पंडितों को कश्मीर छोड़ने के लिए प्रेरित किया.
(www.aljazeera.com/indepth/spotlight/kashmirtheforgottenco...) वजाहत हबीबुल्लाह पूर्वोद्धरित किताब में बताते हैं कि उन्होंने जगमोहन से दूरदर्शन पर कश्मीरी पंडितों से एक अपील करने को कहा था कि वे यहाँ सुरक्षित महसूस करें और सरकार उनकी पूरी सुरक्षा उपलब्ध कराएगी. लेकिन जगमोहन ने मना कर दिया, इसकी जगह अपने प्रसारण में उन्होंने कहा कि “पंडितों की सुरक्षा के लिए रिफ्यूजी कैम्प बनाये जा रहे हैं, जो पंडित डरा हुआ महसूस करें वे इन कैम्पस में जा सकते हैं, जो कर्मचारी जायेंगे उन्हें तनख्वाहें मिलती रहेंगी.” ज़ाहिर है इन घोषणाओं ने पंडितों को पलायन के लिए प्रेरित किया. (पेज़ 86, मृदु राय ने भी इस तथ्य का ज़िक्र किया है). कश्मीर के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ और पत्रकार बलराज पुरी ने अपनी किताब “कश्मीर : इंसरजेंसी एंड आफ़्टर” में जगमोहन की दमनात्मक कार्यवाहियों और रवैयों को ही कश्मीरी पंडितों के विस्थापन का मुख्य ज़िम्मेदार बताया है.(पेज़ 68-73). ऐसे ही निष्कर्ष वर्तमान विदेश राज्य मंत्री और वरिष्ठ पत्रकार एम जे अकबर ने अपनी किताब “बिहाइंड द वेल” में भी दिए हैं. (पेज़ 218-20) कमिटी फॉर इनिशिएटिव ऑन कश्मीर की जुलाई 1990 की रिपोर्ट “कश्मीर इम्प्रिजंड” में नातीपुरा, श्रीनगर में रह रहे एक कश्मीरी पंडित ने कहा है कि “इस इलाक़े के कुछ लोगों ने दबाव में कश्मीर छोड़ा. एक कश्मीरी पंडित नेता एच एन जट्टू लोगों से कह रहे थे कि अप्रैल तक सभी पंडितों को घाटी छोड़ देना है. मैंने कश्मीर नहीं छोड़ा, डरे तो यहाँ सभी हैं लेकिन हमारी महिलाओं के साथ कोई ऐसी घटना नहीं हुई.”18 सितम्बर, 1990 को स्थानीय उर्दू अखबार अफ़साना में छपे एक पत्र में के एल कौल ने लिखा – “पंडितों से कहा गया था कि सरकार कश्मीर में एक लाख मुसलमानों को मारना चाहती है जिससे आतंकवाद का ख़ात्मा हो सके. पंडितों को कहा गया कि उन्हें मुफ़्त राशन,घर, नौकरियाँ आदि सुविधायें दी जायेंगी. उन्हें यह कहा गया कि नरसंहार ख़त्म हो जाने के बाद उन्हें वापस लाया जाएगा.” मुआवज़े पर बात करना अमानवीय है, लेकिन हालाँकि ये वादे पूरे नहीं किये गए पर कश्मीरी विस्थापित पंडितों को मिलने वाला प्रति माह मुआवज़ा भारत में अब तक किसी विस्थापन के लिए दिए गए मुआवज़े से अधिक है. समय समय पर इसे बढ़ाया भी गया, आख़िरी बार उमर अब्दुल्ला के शासन काल में. आप गृह मंत्रालय की वेबसाईट पर इसे देख सकते हैं. बलराज पुरी ने अपनी किताब में दोनों समुदायों की एक संयुक्त समिति का ज़िक्र किया है जो पंडितों का पलायन रोकने के लिए बनाई गई थी. इसके सदस्य थे – पूर्व हाईकोर्ट जज मुफ़्ती बहाउद्दीन फ़ारूकी (अध्यक्ष), एच एन जट्टू (उपाध्यक्ष) और वरिष्ठ वक़ील ग़ुलाम नबी हग्रू (महासचिव). ज्ञातव्य है कि 1986 में ऐसे ही एक प्रयास से पंडितों को रोका गया था. लेकिन पुरी बताते हैं कि हालाँकि इस समिति की कोशिशों से कई मुस्लिम संगठनों, आतंकी संगठनों और मुस्लिम नेताओं से घाटी न छोड़ने की अपील की, लेकिन जट्टू ख़ुद घाटी छोड़कर जम्मू चले गए. बाद में उन्होंने बताया कि समिति के निर्माण और इस अपील के बाद जगमोहन ने उनके पास जम्मू का एयर टिकट लेकर भेजा जो अपनी जीप से उन्हें एयरपोर्ट छोड़ कर आया, उसने जम्मू में एक रिहाइश की व्यवस्था की सूचना दी और तुरंत कश्मीर छोड़ देने को कहा! ज़ाहिर है जगमोहन ऐसी कोशिशों को बढ़ावा देने की जगह दबा रहे थे. (पेज़ 70-71)

कश्मीरी पंडितों का पलायन भारतीय लोकतंत्र के मुंह पर काला धब्बा है, लेकिन यह सवाल अपनी जगह है कि क़ाबिल अफ़सर माने जाने वाले जगमोहन लगभग 400000 सैनिकों के बावज़ूद इसे रोक क्यों न सके? अपनी किताब “कश्मीर : अ ट्रेजेडी ऑफ़ एरर्स” में तवलीन सिंह पूछती हैं – कई मुसलमान यह आरोप लगाते हैं कि जगमोहन ने कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़ने के लिए प्रेरित किया. यह सच हो या नहीं लेकिन यह तो सच ही है कि जगमोहन के कश्मीर में आने के कुछ दिनों के भीतर वे समूह में घाटी छोड़ गए और इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि जाने के लिए संसाधन भी उपलब्ध कराये गए.”

ये बस कुछ तथ्य हैं, लेकिन इनके आधार पर आप चीज़ों का दूसरा चेहरा दिखा सकते हैं.
एक सवाल और है – क्या कश्मीरी पंडित कभी घाटी में लौट सकेंगे?

अभी मै दो सवाल छोड़कर जा रहा हूँ –

क्या कश्मीरी पंडित घाटी लौटना चाहते हैं?
क्या दिल्ली और श्रीनगर चाहते हैं कि कश्मीरी पंडित घाटी में लौटें?

(लेखक इन दिनों “कश्मीरनामा : भविष्य की क़ैद में इतिहास” नामक किताब लिख रहे हैं)

Source : Sabrang
report post quote code quick quote reply
back to top
Rank Image
Maripat's avatar
Offline
Gham-o-Huzn
2,617
Brother
3,198
Maripat's avatar
#363 [Permalink] Posted on 6th May 2020 10:04
The migration of Kashmiri Pandits in the nineties: some facts


(Google Translation)

Written by Ashok Kumar Pandey | Published on: July 5, 2017

1. During the peak of terrorism in Kashmir Valley in the 1990s, a large number of Kashmiri Pandits fled the Valley. The first fact is about the number. The number of Kashmiri Pandit groups and some Hindu rightists was four lakh to seven lakh. But this number is much more than the actual number. Actually the last count of Kashmiri Pandits was done in 1941 and from that it is estimated to 1990. In this, the number of Kashmiri Pandits who left Kashmir for employment and other reasons before 1990 is not reduced. The Kashmiri Pandit PLD Parimu settled in Ahmedabad in his book "Kashmir and Sher-e-Kashmir: A Revolution Derailed" reports the number of Pandits who left Kashmir between 1947-50 and 20% of the total Pandit population. 244) Chitralekha Zutshi in his book "Languages ​​of Belonging: Islam, Regional Identity, and the Making of Kashmir" explains the land reform implemented by the National Conference because of this displacement ( Ejh -318) in Jammu and had been owned by them land in Kashmir poor Muslims, Dalits and other cultivators were actual farming, meanwhile Muslim and Rajput landowner in large number were also moved out of Kashmir. It is known that during Dogra rule, small sections of Dogra Rajputs, Kashmiri Pandits and aristocratic Muslims took over 90 percent of the land of Kashmir. (For details see "Hindu Rulers and Muslim Subjects", Mridu Rai) Even then, the displacement of Kashmiri Pandits from Kashmir for jobs etc. continued (An example is Anupam Kher whose father came to Shimla in the 60s in connection with a job Sumantra Bose, in his book "Kashmir: Roots of Conflict, Path to Peace", tells the number one lakh, (page 120) political scientist Alexander Evans displaced The number of pundits say one million sixty thousand and a half million, Parimu numbers show a half million. The CIA has reported this number to be three lakhs in a report. Towards an important fact, the then commissioner of Anantnag, IAS officer Wajahat Habibullah, quoting the press release of the Kashmiri Pandit Sangharsh Samiti from Srinagar on April 7, 2010, states that around 3000 Kashmiri Pandit families were back in Kashmir around 1998 after conditions became normal. Was migrated from. (See page 79, My Kashmir: The Dying of the Light, Wajahat Habibullah). Let me tell you that the Kashmiri Pandit Sangharsh Samiti is an organization of Pandits who refuse to flee Kashmir despite these terrible situations. Even now some three and a half thousand Kashmiri Pandits live in the valley, there are more than twenty thousand Sikhs and after nineties there was no incident of atrocities on them, yes they have their own economic problems like every common Kashmiri. Teesta Setalvad issued an appeal for her help. (indianculturalforum.in/2016/10/12/humanitarian-appeal-for ...) Also a big problem is about the boys' marriage because the migrant Kashmiri Pandits do not want to send their daughters to Kashmir.

Gujarat that Kashmir, it is terrible for even a man to leave his land in fear, but by increasing the number, it is clear the intention of those who tell.

2. In the above mentioned book, Parimu has told that about fifty thousand Muslims left the valley at the same time. Kashmiri Pandits got a place in the camps, government help and compensation too. But Muslims did not get anything like that (see, same). In his book "Between Democracy and Nation", Seema Qazi quoted a report by Human Right Watch that since 1989, 38,000 refugees had arrived in Kashmir from Kashmir. Keppel Mahmud in his Muzaffarabad visit found that hundreds of Muslims had been killed and drowned in Jhelum. Taking these facts together, she also speaks of the displacement of 48000 Muslims from the atrocities of the army and security forces at that time. These refuges have also accused the security forces of beating, raping and robbing. It is a pity that there is no talk of this displacement like the 1947 Jammu massacre (Ved Bhasin's available interview on the Internet for detail or pages 173-193 of Saeed Naqvi's book "Being the Other").

3. Even in the 1989–90 period, there are considerable differences between the government statistics about the killings of Kashmiri Pandits and the hundred and fifty hundred claims of Kashmiri Pandits. But is it appropriate to see the people killed in that period only on the basis of religion.

According to Parimu, the aim of the killers was to paralyze Kashmir's economy, justice system and administration and kill every ideological opponent. Among those who died in this period were National Conference leader Mohammad Yusuf Halwai, Mirwaiz Maulvi Farooq, ninety-year-old former freedom fighter fighter Maulana Maududi, the most eminent leader of the Gujar community, Qazi Nisar Ahmed, MLA Mir Mustafa, Director of Srinagar Doordarshan Lasa Kaul, H.M. TK General Manager HL Khera, Vice-Chancellor of the University of Kashmir, Musheer ul Haq and his Secretary Abdul Ghani, The members of the Kashmir Legislative Assembly included Nazir Ahmed Wani (same, pages 240-41). Obviously, the victims of terrorists were not only Kashmiri Pandits, but also Muslims. Yes, Pandits had a place to flee, not even for Muslims. He remained in Kashmir and was a victim of atrocities by both terrorists and security forces.

At the time of Jagmohan's rule in Kashmir, an example will suffice to know the attitude of the people there. 21 May 1
report post quote code quick quote reply
back to top
Rank Image
bint e aisha's avatar
Offline
Unspecified
2,248
Sister
1,821
bint e aisha's avatar
#364 [Permalink] Posted on 1st July 2020 14:40
Indian security forces killed grandfather in front of a toddler

www.twitter.com/ForeignOfficePk/status/1278285722517155840

www.twitter.com/SAfridiOfficial/status/1278304659711680519

***

The Prophet (sall Allāhu ʿalayhi wa sallam) said: “The parable of the believers in their affection, mercy, and compassion for each other is that of a body. When any limb aches, the whole body reacts with sleeplessness and fever.”


Narrated Thawban:

The Prophet (ﷺ) said: The people will soon summon one another to attack you as people when eating invite others to share their dish. Someone asked: Will that be because of our small numbers at that time? He replied: No, you will be numerous at that time: but you will be scum and rubbish like that carried down by a torrent, and Allah will take fear of you from the breasts of your enemy and last enervation into your hearts. Someone asked: What is wahn (enervation). Messenger of Allah (ﷺ): He replied: Love of the world and dislike of death.
report post quote code quick quote reply
back to top
Rank Image
Maripat's avatar
Offline
Gham-o-Huzn
2,617
Brother
3,198
Maripat's avatar
#365 [Permalink] Posted on 2nd July 2020 06:59
Desperate Saffron


Because of a tweet from a Princess in the Gulf the Saffron balloon got burst.

Balloon burst is an irreversible process.

It means their balloon will not be inflated again.

Thank God for that.

Now a burst balloon is one thing and a sick psyche is another.

Just because the balloon is burst it does not mean that the Saffron will now not be desperate to achieve again the position they enjoyed recently.

So think of the boast that Indian Prime Minister Mr Narendra Modi was doing some time ago.

Demonetization -Done.
GST - Done.
Triple Talaq - Done.
Removal of Article 370 - Done.
Ram Temple - Done.

And many more items like that.

And then there was the promise for more?

What more could be there?

Well they have the eyes on the small part of Kashmir that is under Pakistan's control. Perhaps including Gilgit-Baltistan.

Then also remember that they had snatched the reserve of the Reserve Bank of India.

Nirmala Sitharaman refused to tell what they were doing with that.

Now further looking at the frustration that China has inflicted upon the Saffron and stitching it with the clue that they have asked Kashmir to hoard gas for two months means only one thing - they are up for their desired grand finale - to make an attempt at taking on POK - the Kashmir under Pakistan's control.
report post quote code quick quote reply
back to top
Rank Image
Muadh_Khan's avatar
Offline
UK
11,516
Brother
10,060
Muadh_Khan's avatar
#366 [Permalink] Posted on 2nd July 2020 10:11
report post quote code quick quote reply
back to top
Rank Image
abuzayd2k's avatar
Offline
Hindustan
933
Brother
-22
abuzayd2k's avatar
#367 [Permalink] Posted on 2nd July 2020 11:05
Muadh_Khan wrote:
View original post

A question to the members having a background in child psychology - is it beneficial and healing for the three year old to be questioned like this since he was a witness to his grandfather's murder?
report post quote code quick quote reply
back to top
Rank Image
Muadh_Khan's avatar
Offline
UK
11,516
Brother
10,060
Muadh_Khan's avatar
#368 [Permalink] Posted on 2nd July 2020 11:14
abuzayd2k wrote:
View original post


I am not commenting on airing it on the Media, of course that's political.

Yes, making him talk about it and that's important. This is exactly how you handle Trauma, you make people talk about it instead of bottling it up inside.

Those who bottle Trauma inside do damage in the long run.

report post quote code quick quote reply
back to top
Rank Image
xs11ax's avatar
Unspecified
3,158
Brother
2,253
xs11ax's avatar
#369 [Permalink] Posted on 2nd July 2020 18:31
Muadh_Khan wrote:
View original post

May they all be reunited in jannatul firdous under Allah's mercy.
report post quote code quick quote reply
back to top
Rank Image
Offline
Unspecified
71
Brother
54
#370 [Permalink] Posted on 5th July 2020 20:25
Fatwa of Mufti Taqi Usmani on selling of properties by Kashmiris to Hindus

https://twitter.com/muftitaqiusmani/status/1279852988526235648

Quote:
كشمير ی مسلمانوں کے لئے اپنی زمین بھارتی ہندوؤں کے ہاتھ فروخت کرنا سخت گناہ اور بدترین غداری ہے کیونکہ بھارت مسلمانوں کی اکثریت کو اقلیت میں تبدیل کرناچاہتاہے مسلمانوں پر واجب ہے کہ اس بھارتی سازش کو ناکام بنائیں مکمل فتوی اس لنک پر ملاحظہ فرمائیں


Quote:
For Kashmiri Muslims, selling their land to Indian Hindus is a grave sin and the worst betrayal because India wants to turn the majority of Muslims into a minority. Muslims must thwart this Indian conspiracy. See the full fatwa on this link.


Full fatwa here
https://muftitaqiusmani.com/ur/%d9%83%d8%b4%d9%85%d9%8a%d8%b1-%d9%85%db%8c%da%ba-%d8%b2%d9%85%db%8c%d9%86-%db%81%d9%86%d8%af%d9%88%da%a9%db%92-%db%81%d8%a7%d8%aa%da%be-%d9%81%d8%b1%d9%88%d8%ae%d8%aa-%da%a9%d8%b1%d9%86%d8%a7/
report post quote code quick quote reply
back to top
Rank Image
Muadh_Khan's avatar
Offline
UK
11,516
Brother
10,060
Muadh_Khan's avatar
#371 [Permalink] Posted on 5th July 2020 20:56
TechMan wrote:
View original post


  1. Kashmir has always been a Muslim state which is not part of India in anyway whatsoever. Now, Hindus are being relocated to Kashmir to change the demographics like the Zionists relocated Jews to Palestine to change the demographics and established the state of Israel.

  2. Under the circumstances, it will be unlawful and a major sin for Muslims of Kashmir to sell their properties to Hindus. This will be treason to not only (other) Muslims of Kashmir but to the entire nation of Islam. This is explicit in the Qur'aan and the Sunnah and statements of Fuqaha that to sell merchandise to the Non-Muslims which can be used in opposition to Muslims is impermissible and a sin (of great magnitude).

  3. It is an obligation upon Pakistan and all Muslim states to assist the oppressed Muslims of Kashmir and to ensure that India's plans do not succeed. May Allah Ta'ala forbid if the history of (establishment of) Israel is repeated in this part of the world!


Muhammad Taqi Usmani
02nd of July 2020

Urdu Fatwa:

muftitaqiusmani.com/ur/%D9%83%D8%B4%D9%85%D9%8A%D8%B1-%D9...

drive.google.com/file/d/1Zuo4hf4CpX0myfvG-mm6k_Abq204-fVn...
report post quote code quick quote reply
back to top
Rank Image
abuzayd2k's avatar
Offline
Hindustan
933
Brother
-22
abuzayd2k's avatar
#372 [Permalink] Posted on 6th July 2020 02:25
If this fatwa were to be publicized in India, Darul Uloom Deoband would have to scramble to counter it and claim that since Kashmir is an integral part of India, the fatwa is invalid here.

Remember, top ulama of DU differed on the question of Pakistan before it came into being (as well as the Kashmir issue). They still differ on the status of Muslims in India with respect to their relationship with the Hindu majority.
report post quote code quick quote reply
back to top
Rank Image
Muadh_Khan's avatar
Offline
UK
11,516
Brother
10,060
Muadh_Khan's avatar
#373 [Permalink] Posted on 6th July 2020 12:04
abuzayd2k wrote:
View original post


Agreed.

This will open very serious fissures between Deobandees (India and Pakistan). The Indian Deobandees have no choice but to issue a Fatwa in favour of their (national) position while Pakistani Deobandees have no choice but to issue a Fatwa in favour of their (national) position and to be honest defend the Kashmirees. The Pakistani Deobandees can easily cover their "nationalistic tendencies" and disguise them as protection of Kahsmirees.

The (Indian) Deobandees cannot and will not bring up the atrocities being committed to Kashmirees but only do so in limited capacity, it is understandable.

We will relive 1928-1945 Deobandi wars in very near future, things are about to get ugly. This time, we don't have people with the manners and respect of Ulama and we don't have Ulama of the calibre in knowledge and Taqwa...I expect YouTube and pdf wars to start between Deobandees.

Jamiat Ulama-e-Hind (India) will HAVE TO COUNTER this Fatwa to stay relevant for Indian Muslims. Their own reason for existence is Indian loyalty like their predecessors.

This is what Allamah Iqbal (RA) predicted that the "biggest idol" is the idol of Nationalism. If only we could focus on the plight of Kashmirees...
report post quote code quick quote reply
back to top

Jump to page: